Tuesday, January 4, 2011

मतलब

मतलब


मतलब से पैदा हुआ,
करते हुए पूरे मतलब
यू ही तुझे मर जाना है
है मतलब का तेरा शरीर और
मतलब का ही ये जमाना है

जब करता है तूं मतलब अपना पूरा
तब तो तुझको मतलब मतलब नही लगता है
मगर जब करता है कोई और पूरा मतलब अपना
तब न जाने क्यों तुझको वो खलता है
जब होता है पूरा तेरा मतलब तब तो सब चलता है
मगर जब कोई कहता है ये ही तुझसे तो
न जाने तूं क्यों जलता है

है बनाना है अगर जग को साफ़ तो
मतलब का शब्द जीवन से अपने हटाना होगा
दुसरे करे तो मतलब और खुद करो तो बरकत
ये दोगलापन अपने जीवन से मिटाना होगा

जीना है अगर तो निस्वार्थ भाव से जियो
करना है अगर कर्म तो निष्काम भाव से करो
क्योंकि कामना ही स्वार्थ की जननी है
कामनाये भटकाती है मन  को की चाहे हो अच्छी या हो बुरी
पर इंसान को हर हाल में ये कामनाये ही तो पूरी करनी है

जब हरकोई अपने मतलब के पीछे भागने लग जायेगा
तब मानव और जानवर में कोई फर्क ही नही रह जाएगा
और तब शायद  मानव समाज का
मानो कोई मतलब ही नही रह जायेगा
है फर्क ये ही जानवर और इंसान में कि
जानवर सिर्फ अपने लिए और इंसान समाज के लिए जीता है
इंसान करता है नौछावर जान अपनी समाज के लिए और
जानवर अपने स्वार्थ के लिए दुसरे का खून तक पीता है

होगा करना फैसला अब क्योंकि है समय अब कम
बनना है वापिस इंसान से जानवर और 
बनकर जानवर अधोपतन की ओर जाना है
या फिर बनकर निस्वार्थ इंसान
धरती को स्वर्ग बनाना है, धरती को स्वर्ग बनाना है II

लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
    

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