Saturday, January 1, 2011

कहानी नई पुरानी

कहानी नई पुरानी

होते ही पैदा शुरू होती है मानव तेरी सवारी है
क्यों रोता है जाते देख किसी को
आज थी उसकी तो आनी कभी तेरी भी बारी है
है सदियों से सुनते आये सब
नही है नया कुछ भी इसमें
है दोहराती वोही पुरानी कहानी है
मेरे बुजर्गो ने थी सुनाई मुझको
है सुनाई मैंने तुमको
कल तुमने भी कहानी ये ही सुनानी है
पर सुनते सुनाते है सब पर नही करता कोई अम्ल
येही इस माया की निशानी है
होते है पैदा लेकर बोझा कर्मो का
दिखती है जंहा झलक एक ख़ुशी की
भाग पड़ते है भूलकर सब
नही समझते ये तब
कि जीवन नही नाम ख़ुशी का
ये तो है आला दुखो का
इन दुखो से ही तुझे ख़ुशी चुरानी है
भोग विलास में नही है ख़ुशी जीवन की
है भोग विलास तो गुलामी इन्द्रियों की
ये गुलामी ही तेरी अज्ञानता की निशानी है
जो चीज करती है खुश आज तुझको
वोही करेगी कल निराश तुझको
जो थी आज नई वो कल हो जानी पुरानी है
उठ खड़ा हो जा और दे तोड़ बंधन माया के
ले आश्रय उस परम पिता परमेश्वर का
अगर सची ख़ुशी तुझको पानी है
वरना सदियों से दोहराता आया
और सदियों तक रहेगा दोहराता
ये वो हो पुरानी कहानी है, ये वोही पुरानी कहानी है II

लेखक : प्रवीन चन्द्र झांझी
    

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