Monday, May 16, 2011

मयखाना या बुतखाना

कौन जीता है  कौन हारा है  
क्या तुम जीत कर भी जीते हो 
और तुम तो पहले से ही हारे हुए थे
अब क्या हारे हो 
जीतने वालो क्या किसी सिद्धांत के बल  पर तुम जीते हो 
या फिर वो हारा है इसलिए तुम जीते हो 
आज है परेशान जनता की वाकई 
क्या कोई नया विकल्प उसके सामने आया है या 
कोई नई बोतल में पुरानी शराब भर कर सामने लाया है 
हारने वालो और जीतने वालो दे दो जनता को 
नया विकल्प सम्मान पुर्वक भ्रष्टाचार मुक्त समाज में जीने का 
इस से पहले की बहुत देर हो जाए 
और नही तो कंही ऐसा न हो की 
तुम्हारा ये राजनीति का मयखाना 
तुम्हारे बुतखाने में तब्दील हो जाए II


लेखक    प्रवीन चन्द्र झांझी 'हारा'    

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